Best Makar Sankranti Essay in हिन्दी (Hindi) & English

Makar Sankranti is the auspicious festival in India. It is Celebrated almost in the whole country. We celebrate this festival on the 14th of January every year, but in some parts of the country, it is celebrated on the 15th of January. Every school, college, university, and the institution has a holiday on this day. Due to this holiday, students get homework related to this festival. They are given to write some essays or speeches for this auspicious occasion.

Students are given these essays as their homework to always stay connected with the culture and ritual of our country. It is important for us not to forget our culture and celebrate each and every festival with all the rituals. Here, we have a list of Makar Sankranti Essay, You can see the format of these essays for your school, college, university, and the institution homework. You can get ideas from it to write your own essay, to get the compliments from your teachers. Have a look at these Makar Sankranti festival essays.

Makar Sankranti Essay in Hindi:

In the northern part of India, people use to speak in Hindi. It is the main native language of the northern part of this country. So, it becomes more important for us to write an essay in Hindi. You can use these essays as your school, university, and institution project. This is the best collection of essays on Sankranti in Hindi with full of facts and information related to this festival. You don’t have to go anywhere to read about this festival. Here we have written all the information related to this festival. You can also help your friend in his/her project to write an essay on Sankranti.

S. No.Essay In Hindi
1.हिंदू धर्म में प्रमुख रूप से मनाए जाने वाले त्योहारों में से एक मकर सक्रांति भी है जिसे हिंदू धर्म के लोग बड़े ही धूमधाम से हर साल जनवरी माह की 14 जनवरी को मनाते है. यह त्यौहार हर साल 14 जनवरी को ही मनाया जाता है कुछ ही ऐसे वर्ष आते है जिसमें इस त्यौहार को 15 जनवरी को मनाया जाता है.

मकर सक्रांति का यह त्यौहार पूरे भारत के साथ-साथ नेपाल भूटान बांग्लादेश जैसे देशों में भी धूमधाम से मनाया जाता है नेपाल में तो इस त्यौहार के दिन राजकीय अवकाश भी घोषित किया जाता है. यह त्योहार बसंत ऋतु के आगमन का प्रतीक होता है इस समय चारों ओर मौसम खुशनुमा होता है और मौसम में एक अलग ही ही ताजगी भरी हुई होती है.

मकर सक्रांति का यह त्यौहार भारत के लगभग सभी राज्यों में मनाया जाता है लेकिन इस त्यौहार को लोग सभी राज्य में अलग-अलग नाम से पुकारते है. यह त्यौहार खुशियों में हर्षोल्लास से भरा हुआ त्यौहार है जो कि बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी को पसंद आता है.

इस त्यौहार के दिन सभी राज्यों में अलग अलग संस्कृति और विचारधारा देखने को मिलती है जो कि सभी लोगों को आपस में जोड़ने का काम करती है. हिंदू धर्म की कैलेंडर के अनुसार इस दिन सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करता है इसलिए इस त्यौहार को मकर सक्रांति कहा जाता है.
हिंदू धर्म में इसी दिन से सभी शुभ कार्य प्रारंभ हो जाते है इसलिए भी इस त्यौहार को अधिक महत्व दिया जाता है. तमिलनाडु राज्य में इस त्यौहार को पोंगल के नाम से मनाया जाता है वहां के लोग इस दिन अपनी फसल काट कर सूर्य देवता को भोग लगाते हैं और उन्हें नमन करते है.

आंध्र प्रदेश, केरल, कर्नाटक जैसे राज्यों में त्यौहार को सक्रांति के नाम से जाना जाता है हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, पंजाब में इस त्यौहार को “माघी” नाम से जाना जाता है उत्तर प्रदेश राज्य में सवार को खिचड़ी के नाम से जाना जाता है क्योंकि यहां पर इस दिन सूर्य को खिचड़ी का भोग लगाया जाता है.

राजस्थान में इस दिन रंग बिरंगी पतंगे उड़ाई जाती है जो की खुशियों का प्रतिक होती है और साथ ही गुड़ और तिल के लड्डू बनाए जाते है. मकर सक्रांति के इस त्यौहार को दान का सबसे बड़ा फरवरी कहा जाता है लोगों का मानना है कि इस दिन जो भी दान किया जाता है उसका अधिक पुण्य मिलता है.

इसलिए इस दिन लोग सुबह से ही कंबल, कपड़े, मिठाईयां गरीबों में बांटना प्रारंभ कर देते हैं इस दिन कुछ लोग शरबत और पकोड़े भी बांटते है. जिन राज्यों से गंगा, यमुना, सरस्वती जैसी पवित्र नदियां होकर निकलती है वहां के लोग सुबह सूर्य उदय के समय नदियों में स्नान करते हैं और सूर्य को जल अर्पण करते है. उनका मानना है कि ऐसा करने से उनके जीवन की सभी बाधाएं दूर हो जाती है.

इसी दिन के बाद भारत का सबसे बड़े कुंभ के मेले का आयोजन किया जाता है. यह त्योहार अपने आप में कई संस्कृतियों एवं विचारधाराओं को लिए हुए चलता है जो कि समाज के हर वर्ग के लोगों को पसंद आता है इसीलिए मकर सक्रांति के त्यौहार को सभी लोग खूब धूमधाम और हर्षोल्लास से मनाते है.
2.Essay In Hindi
मकर संक्रांति का त्योहार हिन्दू धर्म के प्रमुख त्योहारों में शामिल है, जो सूर्य के उत्तरायन होने पर मनाया जाता है। इस पर्व की विशेष बात यह है कि यह अन्य त्योहारों की तरह अलग-अलग तारीखों पर नहीं, बल्कि हर साल 14 जनवरी को ही मनाया जाता है, जब सूर्य उत्तरायन होकर मकर रेखा से गुजरता है।

कभी-कभी यह एक दिन पहले या बाद में यानि 13 या 15 जनवरी को भी मनाया जाता है लेकिन ऐसा कम ही होता है। मकर संक्रांति का संबंध सीधा पृथ्वी के भूगोल और सूर्य की स्थिति से है। जब भी सूर्य मकर रेखा पर आता है, वह दिन 14 जनवरी ही होता है, अत: इस दिन मकर संक्रांति का तेहार मनाया जाता है।

ज्योतिष की दृष्ट‍ि से देखें तो इस दिन सूर्य धनु राशि को छोड़कर मकर राशि में प्रवेश करता है और सूर्य के उत्तरायण की गति प्रारंभ होती है।

भारत के अलग-अललग क्षेत्रों में मकर संक्रांति के पर्व को अलग-अलग तरह से मनाया जाता है। आंध्रप्रदेश, केरल और कर्नाटक में इसे संक्रांति कहा जाता है और तमिलनाडु में इसे पोंगल पर्व के रूप में मनाया जाता है। पंजाब और हरियाणा में इस समय नई फसल का स्वागत किया जाता है और लोहड़ी पर्व मनाया जाता है, वहीं असम में बिहू के रूप में इस पर्व को उल्लास के साथ मनाया जाता है। हर प्रांत में इसका नाम और मनाने का तरीका अलग-अलग होता है।

अलग-अलग मान्यताओं के अनुसार इस पर्व के पकवान भी अलग-अलग होते हैं, लेकिन दाल और चावल की खिचड़ी इस पर्व की प्रमुख पहचान बन चुकी है। विशेष रूप से गुड़ और घी के साथ खिचड़ी खाने का महत्व है। इसेक अलावा तिल और गुड़ का भी मकर संक्राति पर बेहद महत्व है। इस दिन सुबह जल्दी उठकर तिल का उबटन कर स्नान किया जाता है। इसके अलावा तिल और गुड़ के लड्डू एवं अन्य व्यंजन भी बनाए जाते हैं। इस समय सुहागन महिलाएं सुहाग की सामग्री का आदान प्रदान भी करती हैं। ऐसा माना जाता है कि इससे उनके पति की आयु लंबी होती है।

मकर संक्रांति को स्नान और दान का पर्व भी कहा जाता है। इस दिन तीर्थों एवं पवित्र नदियों में स्नान का बेहद महत्व है साथ ही तिल, गुड़, खिचड़ी, फल एवं राशि अनुसार दान करने पर पुण्य की प्राप्ति होती है। ऐसा भी माना जाता है कि इस दिन किए गए दान से सूर्य देवत प्रसन्न होते हैं।

इन सभी मान्यताओं के अलावा मकर संक्रांति पर्व एक उत्साह और भी जुड़ा है। इस दिन पतंग उड़ाने का भी विशेष महत्व होता है और लोग बेहद आनंद और उल्लास के साथ पतंगबाजी करते हैं। इस दिन कई स्थानों पर पतंगबाजी के बड़े-बड़े आयोजन भी किए जाते हैं।

Makar Sankranti Essay in English:

If you have a project to write a Makar Sankranti essay in English. You can get an idea from here to rewrite your own essay. Here, we have the best collection of Sankranti essays in English. These essays contain full of information related to this religious occasion. You can send these essays to your friends and help them to get good grades in their holiday projects.

S. No.Essay In English
1.On Makar Sankranti day, Lord Sun meets his son Lord Shani. Lord Shani was ruling Makar Rashi. According to Vedic astrology, Lord Sun and Lord Shani cannot go well. Hence on Makar Sankranti, bitter past is forgotten and new beginning is started.

According to Mahabharata, wounded Bhishma chose to linger and leave his body on Makar Sankranti so that he can get heavenly home. So from then it is believed that whoever dies on Makar Sankranti will attain Nirvana.

On the day of Makar Sankranti, King Bhagirath brought Holy Ganga River to earth and liberated souls of King Sagar’s sons.

Makar Sankranti is celebrated on January 14th. It is the only festival that is celebrated on the same day except few exceptions. On this day Sun changes his marks to Makara Rashi.

Makara Sankranti is celebrated differently in different region. Devotees take bath in holy rivers and pray Sun God. In South India Makar Sankranti is known as Pongal. In Punjab it is known as Maghi. In Andhra Pradesh and Telangana it is known as Sankranti and celebrated for four days. They are Bhogi, Makara Sankranti, Kanuma and Mukkanuma respectively. In Assam it is celebrated as Bhogali Bihu which is a harvest festival.

In Bihar and Jharkhand it is celebrated on 14th and 15th January. It is known as Sankranti or Sakraat or Khichdi and Teel Barfi are made on this festival. In Delhi and Haryana, brothers gifts Sidha to married sister. In Goa women perform haldi-kumkum. In Gujarat it is called Uttarayan. It is celebrated for two days and it is one of the important festivals for them. Gujarati people fly kites on this festival which is known as Patangi. In Himachal Pradesh it is known as Magha Saaji. In Karnataka kids wear new cloths and visits near and dear ones with Sankranti offerings. Many melas are conducted on this day. Kumbha Mela is the most famous which is held once in 12 years in four holy locations.
2.Essay In English
The festival of Makar Sankranti is one of the main festivals of the Hindu religion, which is celebrated on the ascension of the Sun. The special feature of this festival is that it is celebrated on 14th January, not on different dates like other festivals, every year, when the sun passes through the Makar line after its ascending.

Sometimes it is celebrated on or before one or the other day i.e. 13 or 15 January but this is rarely done. Makar Sankranti is directly related to the geography and position of the sun. Whenever the Sun comes on Makar Line, that day is only on January 14, hence the Makar Sankranti is celebrated on this day.

From an astrological point of view, on this day, the Sun enters the sagittate amount and enters the Capricorn and the speed of the lighting of the Sun begins.

In the isolated areas of India, the festival of Makar Sankranti is celebrated differently. In Andhra Pradesh, Kerala and Karnataka it is called Sankranti and in Tamil Nadu, it is celebrated as the Pongal festival. At this time, a new crop is welcomed in Punjab and Haryana and Lohri festivals are celebrated, while in the form of Bihu in Assam this festival is celebrated with glee. In each province, its name and way of celebrating vary.

According to different beliefs, the recipes of this festival are also different, but the pulse and rice khichadi have become the main identities of this festival. It is important to eat khichdi in particular with jaggery and ghee. Apart from this, sesame and jaggery also have great importance on Makar Sankranti. This morning, after bathing sesame, the bath is done after rubbing. Apart from this, sesame and jaggery laddus and other dishes are also made. At this time Suhagana women also exchange the contents of the suhag. It is believed that this makes her husband’s age longer.

Makar Sankranti is also called the festival of bathing and donation. On this day bathing is important in pilgrimages and sacred rivers, as well as donating according to sesame, jaggery, khichdi, fruit and zodiac, virtue is attained. It is also believed that the Sun god is pleased with the donations made on this day.

Apart from all these beliefs, the Makar Sankranti festival is also an enthusiasm. On this day kite flying also has special significance and people kite with great joy and glee. A large number of kite flying events are also organized in many places on this day.

Here, we have an essay on Makar Sankranti in 200 words. This short length essay is very helpful to share the information about this religious occasion in a short time. You can use these essays in a prayer of the school assembly to tell the children about this amazing festival. This short length essay will not waste your time, but it will put a great impact on children with lots of knowledge about the rituals and cultures related to this festival.

S. No.Essay in 200 Words
1.Makar Sankranti the pan India festival, known by various names is celebrated on 14th of January. Makar Sankranti comes under a solar month of Makara and lunar month of Magha as per the Hindu calendar.

People fly kites under the sun to celebrate the festival in many parts of India. As a part of important spiritual practice, on the day of the festival people take holy baths in rivers for absolution of sins.

Every 12 years, Kumbh Mela (a mass pilgrimage of belief) is organized and on the day of Makar Sankranti, millions of people go to Prayag for the bath and offering of prayers to Lord Sun. Many people on the auspicious occasion of Makar Sankranti exchange sweets made up of jaggery and til to express love and joy.

Makar Sankranti is somewhat similar to the thanksgiving festival celebrated in the western part of the world. The day marks the end of the winter season which is known for infections and sickness, early morning sun on the day of festival help people in getting rid of the harmful bacteria.

Makar Sankranti has regional variations and is celebrated with different customs and traditions across India. Apart from India, Makar Sankranti is very famous in Nepal and is celebrated with the name Maghe Sankranti. It marks the end of the Poush-unlucky and inauspicious period.

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